Tuesday, 23 July 2013

तुम......!!!

तुम
कभी चट्टान का सीना
कभी दो बाँहों की गुड़िया
कभी सवालों की बोझिल सांझ
कभी इतराती गुनगुनी सुबह …. !

तुम
कभी अंतहीन ख़ामोशी
कभी चीखती लहरें
कभी अहिल्या सी निश्चल
कभी नदी सा बदलाव.....!

तुम
कभी सूनी चौखट
कभी चुभती शेहनाई
कभी ढहती दीवारें
कभी नींव की पहली ईंट....!

तुम
कभी शब्द
कभी अर्थ
कभी मैं
कभी तुम
कभी शून्य
कभी रिक्त
तुम …… !!

9 comments:

  1. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  2. खुबसूरत अभिव्यक्ति..शुभकामनाएं

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  3. बढ़िया है मित्रवर-
    आभार-

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  4. 'तुम' के कितने आयाम रच गया कवि का कोमल हृदय!
    Lovely!

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  5. अच्छी लगी रचना...

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  6. ♥ प्रिय बंधुवर आशीष अवस्थी जी 'सागर' ♥
    आपके जन्मदिवस के मंगलमय अवसर पर
    ♥ हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ! ♥
    -राजेन्द्र स्वर्णकार
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